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इतिहास का प्रतिबिंब लापता, प्रशासन मौन — रानी बाग की पहचान खतरे मेंनिगरानी में भारी लापरवाही उजागर, विरासत संरक्षण पर उठे गंभीर सवाल

न्यूज़ राजस्थान टाइम्स | आर.एस. कसाना | जयपुर

राजधानी जयपुर के ट्रांसपोर्ट नगर से गलता जी की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित रानी का बाग, जो अपनी ऐतिहासिक और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है, इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, रानी बाग के प्रवेश द्वारों पर लगे पुराने एंटीक शीशे (Antique Mirrors) रहस्यमय तरीके से गायब हो गए हैं। ये शीशे कई दशकों पुराने थे और राजशाही काल की वास्तुकला के जीवंत अवशेष माने जाते थे।


इतिहास की झलक

माना जाता है कि रानी का बाग कभी शाही परिवार की महिलाओं के विश्राम स्थल के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। उस दौर में रथों और गाड़ियों की आवाजाही पर नज़र रखने के लिए प्रवेश द्वारों पर विशेष कोण पर शीशे लगाए गए थे, ताकि अंदर-बाहर आने वालों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके। समय के साथ भले ही इस स्थल का स्वरूप बदला, लेकिन ये शीशे जयपुर की शाही विरासत के प्रतीक बने रहे।

पास के दुकानदारों का कहना है कि यह शीशे कई वर्षों से यथावत थे, परंतु पिछले कुछ दिनों में रहस्यमय ढंग से गायब हो गए। एक स्थानीय निवासी ने बताया — “रात के समय किसी ने इन्हें निकाल लिया होगा। ये बहुत पुराने और महंगे शीशे थे, पहले इनमें गाड़ियों का प्रतिबिंब दूर से दिख जाता था।”

कई लोगों का अनुमान है कि यह छोटे स्तर पर की गई चोरी हो सकती है, संभवतः चोरी करने वालों को इस धरोहर की ऐतिहासिक महत्ता का अंदाजा नहीं था।


प्रशासनिक अनदेखी उजागर

जब इस विषय पर RSC होम गार्ड के कर्मचारियों से बात की गई, जो वर्तमान में परिसर की निगरानी करते हैं, तो किसी के पास स्पष्ट जवाब नहीं था।
एक कर्मी ने कहा — “हमें जानकारी ही नहीं थी कि शीशे गायब हो गए हैं,”
दूसरे ने जोड़ा — “शायद किसी ने तोड़ दिए होंगे, रात में कोई आवाज नहीं सुनी।”

यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावहीन है।
और भी चिंताजनक यह है कि पुरातत्व विभाग या नगर निगम (हेरिटेज जोन) को अब तक कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में किसी प्रकार की रिपोर्ट या शिकायत दर्ज नहीं हुई, जिससे यह स्पष्ट है कि विरासत संरक्षण को लेकर संवेदनशीलता का अभाव है।


कला और कारीगरी का अनमोल नमूना

स्थानीय इतिहासकारों का कहना है कि इन शीशों की कीमत लाखों रुपये में हो सकती है। माना जाता है कि यह शीशे बेल्जियम और ईरान से विशेष रूप से मंगवाए गए थे और हाथ से जड़ी पीतल की बॉर्डर में जड़े हुए थे। आज ऐसे शीशे बेहद दुर्लभ हैं और उनका गायब हो जाना संस्कृति संरक्षण की लापरवाही का प्रतीक है।


स्थानीय निवासियों की अपील

रानी बाग के आसपास के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की सघन जांच कराई जाए। साथ ही परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने, रात्री गश्त बढ़ाने, और सभी ऐतिहासिक हिस्सों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की भी मांग की गई है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की क्षति का तुरंत पता लगाया जा सके।


प्राचीन संरचनाओं की उपेक्षा का प्रतीक

खबर लिखे जाने तक किसी भी विभाग से कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, नगर निगम हेरिटेज विंग ने इस प्रकरण की प्रारंभिक जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है और जल्द एक फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट तैयार की जा सकती है।

रानी बाग के ये शीशे केवल कांच के टुकड़े नहीं थे, बल्कि जयपुर की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा थे।
उनका यूं गायब हो जाना इस बात का प्रतीक है कि हम अपने अतीत की रक्षा में कितने लापरवाह हो गए हैं।

न्यूज़ राजस्थान टाइम्स के कैमरे से ली गई तस्वीरों में साफ दिखाई देता है कि जहां पहले बड़ा एंटीक शीशा लगा था, वहां अब केवल खाली लाल फ्रेम बचा है — जो कभी इतिहास का प्रतिबिंब दिखाता था, आज खालीपन का प्रतीक बन गया है।