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राजस्व व्यवस्था शर्मसार: तहसीलदार पर भ्रष्टाचार , फर्जी नामांतरण , अवैध आदेशों से भू-माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लगे गंभीर आरोप

प्राइवेट ड्राइवर तहसीलदार के कमाऊ पूतों के साथ मिलकर ऑफिस में अभी भी कर रहा है दलाली का काम जिसका रिश्वत लेते हुए पहले बन गया था वीडियो

सिकराय | जब किसी तहसीलदार पर लगातार भ्रष्टाचार, दलाली, अवैध नामांतरण और जनता से मनमानी वसूली के आरोप लगते रहे फिर भी एसडीएम और स्थानीय विधायक मौन बने रहे तो सवाल सिर्फ एक अधिकारी पर नहीं बल्कि पूरे सिस्टम के कार्य शैली पर खड़े होते हैं जनता का आरोप है की तहसील कार्यालय में बिना सिफारिश और बिना पैसे की कम होना मुश्किल होता जा रहा है यदि यह सच है तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं बल्कि गरीब और आम नागरिक के अधिकारो खुला शोषण है तहसीलदार हेमेंद्र मीणा एवं उसके कमाऊ पूत गिरदावर,पटवारी की कार्य शैली राजस्व व्यवस्था को लगातार शर्मसार कर रही हैं तहसीलदार द्वारा नियमों की अनदेखी कर लगातार SC और ST की भूमि को जनरल के नाम करने का कार्य लगातार किया जा रहा है एक ऐसा ही मामला पटवार मंडल गीजगढ़ B में आया है उस भूमि का खसरा नंबर 3991/ 1462 है जिसमें पटवारी एवं तहसीलदार ने SC की भूमि को मोटा पैसा खाकर जनरल के नाम कर दिया गीजगढ़ हल्का पटवारी से इस मामले में बात की गई तो उन्होंने बताया कि न्यायिक आदेश के आधार पर भूमि का नामांतरण किया गया है जबकि रिकॉर्ड में शुद्धि पत्र का हवाला देकर भूमि के खातेदारों का फेर बदल किया है जबकि रिकॉर्ड में शुद्धि पत्र भी नहीं किया है संलग्न फिर दोबारा पटवारी से बात की गई तो पटवारी ने कहा कि मैने तो साहब के आदेश की पालना की है मुझे और इस मामले में कुछ भी पता नहीं है इतना कह कर पटवारी ने फोन काट दिया यही नहीं ऐसे कई दर्जनों मामले हैं जिसमें सिकराय तहसीलदार ने भ्रष्टाचार करके स्वयं की तो जेब भरी ही है और राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचाया है सिकंदरा कस्बे में भी एक मामला सामने आया है जिसमें औद्योगिक प्रयोजनार्थ भूमि का नियमों की अनदेखी कर गिरदावर,पटवारी एवं तहसीलदार ने मोटा पैसा खाकर भूमि का खातेदारों में बटवारा कर दिया जब की यह भूमि भी SC की थी पूर्व में आमजन द्वारा तहसीलदार एवं उनके कमाऊ पूतों दर्जनों शिकायत की गई जिस पर पूर्व जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार शिकायत पर जांच कमेटी गठित कर दी और SDM नवनीत कुमार को जांच अधिकारी बनाया उन्होंने करीब 9 महीने बीत जाने के बाद भी आज तक जांच रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया जबकि दौसा कलेक्टर एवं एसडीएम को भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड एवं रिश्वत लेनदेन की वीडियो उपलब्ध करवाई गई थी

विधायक जी की चुप्पी अब सवालों के घेरे में

तहसील में भ्रष्टाचार के आरोप लगातार गूंज रहे हैं, जनता शिकायत पर शिकायत कर रही है, लेकिन स्थानीय विधायक विक्रम बंशीवाल की चुप्पी अब लोगों को खटकने लगी है। जनता तंज कसते हुए कह रही है —“चुनाव के समय जनता की गलियों में हर दर्द दिखाई देता है, लेकिन कुर्सी मिलते ही भ्रष्टाचार भी शायद ‘विकास’ जैसा नजर आने लगता है।”लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर विधायक जी की ऐसी कौन-सी राजनीतिक मजबूरी है कि तहसील में चल रहे कथित भ्रष्टाचार पर एक शब्द तक नहीं निकल रहा?क्या जनता की आवाज अब सिर्फ वोट तक सीमित रह गई है?या फिर सत्ता की खामोशी ही भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी ढाल बन चुकी है?तंज तो यह भी है कि आम आदमी अगर बिजली का बिल लेट भर दे तो नोटिस तुरंत आ जाता है, लेकिन भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों पर जिम्मेदार नेताओं की संवेदनाएं अचानक “मौन व्रत” पर चली जाती हैं।जनता में चर्चा है —“अगर विधायक जनता के सवालों पर भी चुप रहेंगे, तो फिर जनता उन्हें अपना प्रतिनिधि माने या सिर्फ चुनावी मौसम का मेहमान?”अब लोग खुलकर कहने लगे हैं कि“तहसील में भ्रष्टाचार जितना खतरनाक नहीं, उससे ज्यादा खतरनाक जिम्मेदार नेताओं की चुप्पी है… क्योंकि मौन समर्थन कई बार खुले संरक्षण से भी बड़ा माना जाता है।”

एसडीएम साहब की खामोशी अब दफ्तर की दीवारों से बाहर चर्चा का विषय बन चुकी है

तहसील में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगातार उठ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा ऐसा है मानो शिकायतें किसी बंद कमरे में कैद कर दी गई हों। जनता तंज कसते हुए कह रही है —“लगता है एसडीएम कार्यालय में फाइलें नहीं, सिर्फ इंतजार चलता है…इंतजार इस बात का कि जनता थक जाए, शिकायतें पुरानी हो जाएं और सवाल खुद ही दम तोड़ दें।”आखिर ऐसा कौन-सा दबाव है कि गंभीर आरोपों पर भी प्रशासनिक सख्ती दिखाई नहीं देती?क्या एसडीएम की कुर्सी सिर्फ बैठकों और आदेशों के लिए बची है, या भ्रष्टाचार पर कार्रवाई भी उसकी जिम्मेदारी है?तंज तो यह भी है कि आम आदमी की छोटी गलती पर नियमों की पूरी किताब खुल जाती है, लेकिन जब भ्रष्टाचार की शिकायत आती है तो वही नियम शायद फाइलों में “गुम” हो जाते हैं।जनता अब खुलकर कह रही है —“अगर एसडीएम नवनीत कुमार चाह लें तो कई चेहरों से नकाब उतर सकते हैं,लेकिन खामोशी बता रही है कि या तो सिस्टम बेबस है… या फिर बहुत कुछ देखकर भी अनदेखा किया जा रहा है।”सबसे बड़ा सवाल यही है —क्या प्रशासन जनता के भरोसे को बचाएगा,या फिर चुप्पी ही भ्रष्टाचार की सबसे मजबूत ढाल बनी रहेगी?”यदि समय रहते दौसा जिला कलेक्टर ने निष्पक्ष जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की तो जनता का प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से विश्वास पूरी तरह खत्म हो सकता है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी भ्रष्टाचार पर लगाम लगाते हैं या फिर चुप्पी साधकर आरोपों को और मजबूत करते हैं

नशे का अवैध कारोबार बेलगाम,युवाओं का भविष्य दांव पर—बीट प्रभारियों की मेहरबानी युवा पीढ़ी पर पड़ रही भारी

अवैध खनन का संगठित खेल,धरती छलनी सिस्टम खामोश

जिम्मेदार भ्रष्ट अधिकारीयो के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं ?

जिम्मेदारी तय क्यों नहीं?

जिले में अवैध खनन अब छिपा हुआ अपराध नहीं, बल्कि खुलेआम चल रहा संगठित धंधा बन चुका है। नदियों के किनारे, पहाड़ियों और कृषि भूमि में बिना पट्टा, बिना अनुमति और बिना पर्यावरण स्वीकृति के खनन जारी है। हैरानी यह कि यह सब प्रशासन की निगरानी में होने के बावजूद रुक नहीं रहा।स्थानीय लोगों के अनुसार, रात होते ही भारी मशीनें सक्रिय हो जाती हैं और सुबह तक खनिज से भरे ओवरलोड वाहन सड़कों पर पुलिस के सामने ही दौड़ते दिखते हैं। कई बार शिकायतों और धरपकड़ के बाद भी कुछ ही दिनों में वही माफिया फिर सक्रिय हो जाते हैं।

ज़मीनी हकीकत बिना पट्टा खनन स्थलों पर मशीनों की खुली आवाजाहीओवरलोड वाहनों से सड़कों और पुलों को नुकसाननदियों का प्राकृतिक बहाव बाधित, भू-जल स्तर गिराकृषि भूमि बंजर होने की कगार परसूत्रों का दावा है कि अवैध खनन से सरकार को लाखों–करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि कार्रवाई के नाम पर कभी-कभार वाहनों की जब्ती और मामूली जुर्माना लगाकर मामला निपटा दिया जाता है।

1️⃣ जिन स्थानों पर बार-बार अवैध खनन पकड़ा गया, वहाँ आज तक स्थायी रोक क्यों नहीं लगाई गई?

2️⃣ दिन रात भारी मशीनें और ओवरलोड वाहन चल रहे हैं—क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है?

3️⃣ कार्रवाई के नाम पर सिर्फ वाहनों की जब्ती और मामूली जुर्माना—क्या यही माफिया पर लगाम लगाने का तरीका है?

4️⃣ जब्त वाहनों और मशीनों को दोबारा कैसे छोड़ा गया, किसके आदेश पर?

5️⃣ अवैध खनन से सरकार को हुए वास्तविक राजस्व नुकसान का आकलन कब किया गया?

6️⃣ क्या अब तक किसी बड़े सरगना या संरक्षण देने वाले अधिकारी पर कार्रवाई हुई है?

7️⃣ पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के लिए कौन जिम्मेदार तय किया गया?

8️⃣ शिकायत करने वाले स्थानीय लोगों को डराने या दबाने की शिकायतों पर क्या कदम उठाए गए?

9️⃣ अवैध खनन रोकने के लिए ड्रोन निगरानी, सीसीटीवी या विशेष टास्क फोर्स कब सक्रिय होगी?

🔟 जनता को यह भरोसा कब मिलेगा कि कानून सबके लिए बराबर है, माफिया के लिए नहीं?अवैध खनन केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा है। अब देखना यह है कि कार्रवाई कागज़ों तक सीमित रहती है या सच में माफिया और संरक्षण देने वालों तक पहुँचती है। क्या जिला कलेक्टर अब उपखंड अधिकारी, फॉरेस्ट विभाग, खनन विभाग एवं संबंधित थाना अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर कोई ठोस कदम उठाएंगे ?

पूर्व मंत्री हेमसिंह भड़ाना का निधन

जयपुर | भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हेम सिंह भड़ाना का आकस्मिक निधन हो गया। भड़ाना के निधन से भारतीय जनता पार्टी ने एक प्रखर और तेज तर्रार नेता खो दिया। वहीं गुर्जर समाज ने भी समाज का हीरा जो समाज के लिए हमेशा संघर्ष करता रहा है निधन होने से बड़ी क्षति हुई है।पूर्व मंत्री हेमसिंह भड़ाना के निधन पर मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने भी शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि“भाजपा राजस्थान के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री हेमसिंह भडाणा जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है।भडाणा जी ने सदैव जनहित और प्रदेश के विकास को प्राथमिकता दी। उनका निधन भाजपा परिवार और राजस्थान की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।”ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ प्रेमचंद बैरवा ने भी पूर्व कैबिनेट मंत्री हेम सिंह भड़ाना के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि,,,“भाजपा राजस्थान के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री हेमसिंह भडाणा जी के निधन का अत्यंत दुःखद समाचार प्राप्त हुआ।भडाणा जी का संपूर्ण जीवन जनसेवा, संगठन की मजबूती और राजस्थान के विकास को समर्पित रहा। उनका सरल व्यक्तित्व और समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।उनका जाना न केवल भाजपा परिवार, बल्कि राजस्थान की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवारजनों एवं समर्थकों को यह गहन दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।”भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी हेम सिंह भड़ाना के निधन पर शोक व्यक्त किया उन्होंने कहा कि,,,“भाजपा राजस्थान के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री हेमसिंह भडाणा जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।भडाणा जी ने अपने सार्वजनिक जीवन में सदैव जनहित, संगठन की मजबूती और राजस्थान के विकास को सर्वोपरि रखा। उनका निधन भाजपा परिवार तथा प्रदेश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है

पटवार घर सूना, ई-मित्र पर दस्तखत—सिकंदरा पटवारी पर अवैध वसूली के आरोप

जनसुनवाई बनी औपचारिकता, सिकंदरा के लोग न्याय के लिए भटकने को मजबूर

जिले की सिकंदरा उपतहसील के अंतर्गत सिकंदरा ग्राम पंचायत में पटवारी पद पर आसीन जीवन राम मीना की कार्य शैली पर ग्रामीणों द्वारा लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं स्थानीय लोगों का कहना है कि पटवारी जीवनराम मीणा महीने में बहुत कम ड्यूटी पर आते हैं और जब आते हैं तो पटवार घर में न मिलकर मिलते हैं ई मित्र की दुकानों पर और जिन कागजातों में पटवारी के हस्ताक्षर जरुरी होते हैं उनमें हस्ताक्षर कराने के लिए लोग आए दिन पटवार घर के चक्कर काटते रहते हैं लेकिन पटवारी मौके पर नहीं मिलता है फोन करते हैं तो फोन नहीं उठाते हैं गलती से यदि फोन उठा लिया तो उनका जवाब यही रहता है कि मैं फिल्ड में हूं अभी समय लगेगा आपको यदि जल्दी है तो आप ई मित्र की दुकान कागज रख दो मैं देख लूंगा

स्थानीय लोगों ने सिकंदरा पटवारी पर अवैध वसूली का आरोप लगाते हुए कहा कि सिकंदरा में अलवर गंगापुर मेगा हाईवे पर लकड़ी मंडी संचालित है जहां आए दिन सैकड़ो वाहनों की संख्या में हरे पेड़ों की लकड़ी काटकर लाई जाती है इन पर कार्यवाही करने की जिम्मेदारी पटवारी की भी बनती है लेकिन इन पर कार्रवाई न करने का कारण आखिर अवैध वसूली नहीं है तो क्या है ? लगातार प्रकृति प्रेमियों की शिकायत के बाद भी इसी ग्राम पंचायत में से हजारों की संख्या में पेड़ कट गए और उन्हें लकड़ी मंडी में लाकर बेच दिया गया ऐसे गैर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ प्रशासन आखिर कार्यवाही क्यों नहीं कर रहा है ?

सिकंदरा ग्राम पंचायत के सरपंच कैप्टन रामावतार सैनी का कहना है कि आए दिन जरूरतमंद स्थानीय लोग मेरे पास फोन करते हैं और पूछते हैं कि आपकी ग्राम पंचायत का पटवारी कहां पर है तब मैं पटवारी को फोन करता हूं तो पटवारी फोन नहीं उठाता है पटवारी की गैर जिम्मेदारियों को देखते हुए जनसुनवाई के अलावा उपखंड कार्यालय में उपस्थित होकर उपखंड अधिकारी को लिखित एवं मौखिक तौर पर उसकी शिकायत दी है जिस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है आए दिन लोग पटवार घर एवं ग्राम पंचायत के चक्कर काटते रहते हैं जब उन्हें मौके पर पटवारी नहीं मिलता है तो निराश होकर वापस लौट जाते हैं सिकंदरा उप तहसीलदार डी आर मीना से पटवारी जीवन राम मीणा पटवार घर एवं उप तहसील कार्यालय में नहीं आने का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मैं खुद भी इससे परेशान हूं यह न तो मेरा फोन उठाता है और आए दिन ड्यूटी पर न आकर फरार रहता है इसके बारे में मैंने सिकराय उपखंड अधिकारी को अवगत पहले ही करवा दिया था

अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सिकराय उपखंड अधिकारी (एसडीएम) की कार्यशैली को लेकर खड़ा हो गया है।स्थानीय लोगों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और प्रकृति प्रेमियों का आरोप है कि इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद एसडीएम स्तर पर जानबूझकर आंखें मूंदी गई हैं।जब पटवारी महीनों तक ड्यूटी से नदारद रहता है उप तहसीलदार खुद लिखित रूप से शिकायत करने की बात स्वीकार करता हैसरपंच द्वारा जनसुनवाई और कार्यालय में शिकायत दी जाती हैअवैध खनन, लकड़ी कटान और परिवहन खुलेआम चलता है। तो सवाल उठता है कि आखिर एसडीएम सिकराय किस दबाव या संरक्षण में कार्रवाई नहीं कर रहे?स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पटवारी पर कार्रवाई नहीं हो रही, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि उच्च स्तर का संरक्षण प्रतीत होता है।क्या यह संरक्षण बिना किसी लाभ के संभव है? क्या अवैध खनन और लकड़ी माफिया को प्रशासनिक शह मिल रही है?प्रकृति प्रेमियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार लिखित व मौखिक रूप से एसडीएम सिकराय को हरे पेड़ों की कटाई, अवैध खनन और लकड़ी मंडी की जानकारी दी, लेकिन हर बार फाइलें दबा दी गईं और कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।लोगों का कहना है कि“यदि एसडीएम चाहें तो एक दिन में कार्रवाई हो सकती है, लेकिन जानबूझकर चुप्पी साधी गई है।”यह चुप्पी अब मनमानी और संदिग्ध कार्यशैली के आरोपों में बदल चुकी है।आमजन का सवाल है कि क्या प्रशासन आम लोगों और प्रकृति के खिलाफ खड़ा है?क्या सरकारी पद का उपयोग जनता की सेवा के बजाय अवैध गतिविधियों को ढाल देने के लिए किया जा रहा है?यदि यही हाल रहा, तो आने वाले समय में न पर्यावरण बचेगा,न प्रशासन पर जनता का भरोसा और न ही कानून का भय अब जनता और प्रकृति प्रेमियों ने मांग की है कि सिकराय एसडीएम की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो पटवारी जीवनराम मीणा सहित जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई हो अवैध खनन और लकड़ी कटान पर तत्काल सख्त रोक लगे।

किसानों की मेहनत पर वार, फसल रौंदकर निकाला रास्ता

पांचोली गांव में सड़क निर्माण को लेकर नियमों की अनदेखी के आरोप

दौसा। सड़क निर्माण कार्य में नियमों की खुली अनदेखी और सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप सामने आए हैं। पूरा मामला सिकराय उपखंड क्षेत्र के पांचोली गांव का है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण से पहले राजस्व विभाग की आवश्यक अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इससे पूरे निर्माण कार्य की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए न तो राजस्व रिकॉर्ड की विधिवत जांच की गई और न ही हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन किया गया। आरोप है कि उपखंड अधिकारी द्वारा मौके की आवश्यक जांच रिपोर्ट तैयार किए बिना और अंतिम स्वीकृति से पहले ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। नियमों के अनुसार भूमि की प्रकृति सरकारी या निजी होने की स्थिति स्पष्ट करना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।


पूर्व आपत्ति के बावजूद जारी रखा गया निर्माण

जानकारी के अनुसार संबंधित भूमि पर पूर्व में भी आपत्ति दर्ज की जा चुकी थी। इसके बावजूद प्रशासन ने निर्माण कार्य को नहीं रोका। ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग की रिपोर्ट के बिना ही योजना को स्वीकृति दे दी गई, जो नियमों के विरुद्ध है।


पुराना रास्ता चालू, फिर भी नया रास्ता बनाया जा रहा

ग्रामीणों ने बताया कि मौके पर पहले से रास्ता मौजूद है। यह रास्ता लगभग 25 वर्ष पूर्व ग्राम पंचायत द्वारा बनवाया गया था और आज भी चालू है। इसके बावजूद प्रशासन ने खड़ी फसल को रौंदकर नए रास्ते का निर्माण शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्रवाई समझ से परे है और इसके पीछे भ्रष्टाचार की आशंका है।


खातेदारों ने लगाए गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप

खातेदार सीताराम गुर्जर और मुकेश गुर्जर ने प्रशासन पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि पटवारी अशोक कुमार की मौका रिपोर्ट और ऑनलाइन नक्शा ट्रेस के अनुसार उनकी भूमि का फ्रंट एरिया 208 मीटर दर्शाया गया है, जबकि मौके पर नापतोल में यह कम पाया गया।

खातेदारों का कहना है कि पूर्व से बना रास्ता भी उनकी निजी खातेदारी भूमि में आ रहा है। यह रास्ता करीब 150 मीटर तक मुकेश गुर्जर की खातेदारी भूमि में पहले से मौजूद है। रास्ते के दूसरी ओर खसरा नंबर 628 स्थित है, जो चरागाह भूमि बताई जा रही है।


सीमा ज्ञान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं

पटवारी अशोक कुमार की रिपोर्ट के अनुसार खसरा नंबर 604 रिकॉर्ड में रास्ता दर्ज है, जिसकी चौड़ाई लगभग चार मीटर है। 8 नवंबर 2024 को हल्का पटवारी पांचोली, पीलोडी, करोड़ी और चांदेरा के पटवारियों ने संयुक्त रूप से विभिन्न खसरों का निरीक्षण किया। इस दौरान सीमा ज्ञान में 12 से 16 मीटर तक का अंतर सामने आया।

इसके बाद संयुक्त टीम ने भू-प्रबंधन विभाग को सीमा ज्ञान के लिए पत्र लिखा। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या भू-प्रबंधन विभाग की टीम ने इस भूमि का सीमा ज्ञान किया या नहीं। खातेदारों का आरोप है कि बिना सीमा ज्ञान के ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया।


हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद निर्माण

खातेदारों का कहना है कि मानपुर-सिकराय रोड पर स्थित उनकी व्यावसायिक भूमि पर हाईकोर्ट का स्थगन आदेश भी है। इसके बावजूद खड़ी फसल के बीच नए रास्ते का निर्माण किया जा रहा है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर किस मजबूरी में प्रशासन ने यह कार्य शुरू कराया।


ग्राम पंचायत से उठे सवाल

खातेदार सीताराम गुर्जर ने बताया कि उनकी खातेदारी भूमि के पास लगभग 25 वर्ष पूर्व तत्कालीन सरपंच खैराती लाल बैरवा ने सीमा ज्ञान के बाद रास्ता बनवाया था। वर्ष 2014 में ग्राम पंचायत ने उसी रास्ते को ग्रेवल सड़क में बदला। इसके बाद 2022 में वर्तमान सरपंच गुलाब बैरवा ने इसी रास्ते का नवीनीकरण कराया, जिस पर लाखों रुपये खर्च किए गए।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि पुराना रास्ता गलत स्थान पर था तो वर्षों तक उस पर सरकारी पैसा क्यों खर्च किया गया। यदि रास्ता सही था, तो अब नए रास्ते के निर्माण की जरूरत क्यों पड़ी। ग्रामीणों ने इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला बताया है।


पटवारी और सरपंच का पक्ष

जब इस मामले में पटवारी अशोक कुमार से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि वे केवल अपने अधिकारियों के आदेशों की पालना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सही और गलत का निर्णय अधिकारी ही करेंगे। सीमा ज्ञान को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने किए बालाजी महाराज के दर्शन

मेहंदीपुर बालाजी पहुंचीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

दौसा। शनिवार दोपहर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता विश्वविख्यात आस्थाधाम मेहंदीपुर बालाजी पहुंचीं। यहां उन्होंने बालाजी महाराज के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री के आगमन से पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन गया।

इस दौरान मंदिर ट्रस्ट की ओर से उनका पारंपरिक और भव्य स्वागत किया गया। इससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में खास उत्साह देखने को मिला।


मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच हुए दर्शन

मंदिर ट्रस्ट के सिद्धपीठ महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज ने स्वयं मुख्यमंत्री की अगवानी की। इसके बाद मंत्रोच्चार, शंखनाद और जयकारों के बीच मुख्यमंत्री ने बालाजी महाराज के दर्शन किए।

साथ ही उन्होंने विशेष पूजा-अर्चना की। मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई। इस अवसर पर सोने के चोले का टीका लगाकर विशेष अनुष्ठान किया गया।


देश की सुख-समृद्धि की कामना

दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने देश में शांति, खुशहाली और समृद्धि की कामना की। इसके अलावा बालाजी महाराज को सवामणी का भोग भी अर्पित किया गया, जो धाम की प्रमुख धार्मिक परंपरा मानी जाती है।


भैरव बाबा और प्रेतराज सरकार के भी किए दर्शन

बालाजी महाराज के दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने भैरव बाबा और प्रेतराज सरकार के भी दर्शन किए। तीनों देवस्थानों में दर्शन कर उन्होंने आध्यात्मिक ऊर्जा और विश्वास का अनुभव किया।


कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस रही अलर्ट

मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। दौसा और करौली जिले की पुलिस पूरी तरह अलर्ट रही। मंदिर परिसर से लेकर आसपास के क्षेत्रों में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिली।


भाजपा जिला अध्यक्ष को मंदिर परिसर से बाहर भेजने का मामला

मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए दौसा भाजपा जिला अध्यक्ष लक्ष्मी रेला अपनी कार्यकारिणी के साथ मंदिर परिसर में मौजूद थीं। हालांकि इस दौरान मानपुर डीएसपी धर्मराज चौधरी ने उन्हें मंदिर परिसर से बाहर भेज दिया।

लक्ष्मी रेला ने बताया कि उनके पास अनुमति थी, इसके बावजूद उन्हें बाहर निकाला गया। वहीं, डीएसपी धर्मराज चौधरी ने स्पष्ट किया कि उन्हें समझाकर सीएम के स्वागत की व्यवस्था के लिए बाहर भेजा गया था। उन्होंने कहा कि किसी तरह का विवाद नहीं हुआ।


महंत नरेशपुरी महाराज से की शिष्टाचार भेंट

दर्शन के बाद मुख्यमंत्री महंत निवास पहुंचीं। यहां उन्होंने सिद्धपीठ के महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान आध्यात्मिक, सामाजिक और धार्मिक विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।

इस अवसर पर दौसा जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार यादव, पुलिस अधीक्षक सागर राणा, करौली एसपी लोकेश सोनवाल सहित कई अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

रिश्तों की मर्यादा है हुई तार-तार! बेटे पर मां से दुष्कर्म का मामला दर्ज

दौसा – जिले में रिश्तों की मर्यादा तार-तार करने का मामला सामने आया. मां ने अपने गर्भ में जिस बेटे को नौ माह रखा, उसी पर मां से दुष्कर्म करने का गंभीर प्रकरण दर्ज हुआ है. यह मामला सिर्फ पुलिस रजिस्टर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि क्षेत्र में चर्चा और हैरानी का विषय बन गया
रामगढ़ पचवारा थाना प्रभारी मदन लाल ने बताया कि पीड़िता के दो बेटे हैं. बड़े बेटे के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है. पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया. पुलिस टीम ने घटनास्थल पर परिस्थितियों की जांच की. कमरे की स्थिति, दरवाजों के लॉक, पीड़िता के बयान और संभावित डिजिटल साक्ष्य जांच में शामिल किए. पुलिस जांच में जुट गई है

पति ने दर्ज कराया केस

घटना बुधवार देर रात की बताई जा रही है, जब पीड़िता अपने कमरे में अकेली सो रही थी. तभी बड़ा बेटा कमरे में आया और दुष्कर्म कर भाग गया. मामले की जानकारी पीड़िता के पति को लगी तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. उसने तुरंत थाने जाकर अपने बेटे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया

जांच में जुटी पुलिस – एसएचओ मदनलाल ने बताया कि पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या आरोपी नशे में था. क्या पहले भी किसी तरह का विवाद या अप्राकृतिक व्यवहार देखा गया था. क्या परिवार में कोई अंदरूनी तनाव चल रहा था. जांच अधिकारी का कहना है कि हर पहलू की जांच होगी

अनुपम अपार्टमेंट, प्रताप नगर में बदहाल व्यवस्था — निवासियों ने उप आवासन आयुक्त से की त्वरित हस्तक्षेप की मांग

जयपुर ( न्यूज़ राजस्थान टाइम्स )। प्रताप नगर स्थित अनुपम अपार्टमेंट (राजस्थान हाउसिंग बोर्ड अंतर्गत) में रह रहे सैकड़ों परिवार इस समय गंभीर अव्यवस्थाओं से परेशान हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद समस्याओं का समाधान न होने पर निवासियों ने उप आवासन आयुक्त श्री संजय शर्मा को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

आपकी आवाज़, भरोसे के साथ

सफाई व्यवस्था चरमराई — स्वच्छता बनाए रखना मुश्किल


निवासियों ने बताया कि पूरे परिसर में मात्र 5–7 सफाईकर्मी नियुक्त हैं, जिससे रोजाना स्वच्छता बनाए रखना संभव नहीं हो पाता। कचरा उठाने वाली गाड़ी भी नियमित नहीं आती, जिसके कारण कई जगहों पर कचरा जमा हो रहा है।

लिफ्टें बंद, बुजुर्ग और महिलाएँ सबसे ज्यादा प्रभावित


बी1 ब्लॉक की लिफ्ट अब तक शुरू नहीं हो सकी है। वहीं A3, A4 और A5 ब्लॉक की लिफ्ट लंबे समय से खराब पड़ी हैं। अन्य ब्लॉकों में भी लिफ्टों की लाइट, फायर अलार्म और पैनल सिस्टम क्षतिग्रस्त हैं। निवासियों ने इसे दुर्घटना का बड़ा खतरा बताया और सभी लिफ्टों के तत्काल मेंटेनेंस की मांग की।

सुरक्षा व्यवस्था कमजोर — रात में छेड़छाड़ और चोरी की घटनाएँ


वर्तमान में केवल दो सुरक्षा गार्ड ड्यूटी पर हैं, जिससे इतने बड़े परिसर की निगरानी असंभव है। निवासियों ने रात्रिकालीन सुरक्षा बढ़ाने, अतिरिक्त गार्ड तैनात करने और मुख्य गेट पर 4 CCTV कैमरे लगाने की मांग की है।

अधूरे कार्यों का बोझ झेल रहे हैं निवासी


निवासियों ने आरोप लगाया कि राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने बिना मेंटेनेंस पूरा किए ही कब्जे दे दिए। कई जगह ब्लॉकों के बीच सुरक्षा प्लेटें तक नहीं लगाई गईं, जो गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।

पानी की सप्लाई भी संकटग्रस्त


सोसाइटी में 4 बोरिंग होने के बावजूद केवल एक ही मोटर चालू है, जिससे सभी 9 ब्लॉक्स में पानी सप्लाई की जा रही है। लगातार भार से मोटर के खराब होने का खतरा बना रहता है। निवासियों ने शेष 3 बोरिंग में भी मोटर लगाने की मांग रखी।

चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सामने आई अनियमितताएँ


स्थानीय निवासी राजेंद्र सिंह कसाना ने बताया कि सोसाइटी में अभी तक चुनाव नहीं हुए हैं और निवासियों ने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी लोग पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से चुनावी अधिकार हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। निवासियों का स्पष्ट कहना है कि मतदान का अधिकार केवल वास्तविक अधिकृत कब्जाधारकों को ही मिले।

कार्रवाई न होने पर बढ़ती नाराज़गी


निवासियों ने बताया कि इन मुद्दों को कई बार लिखित में RHB को भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है और वे तत्काल समाधान की मांग कर रहे हैं।

निवासियों का स्पष्ट संदेश


“सोसाइटी की समस्याएँ अब दैनिक जीवन, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को प्रभावित करने लगी हैं। आवासन मंडल तत्काल हस्तक्षेप करे,” निवासियों ने ज्ञापन में लिखा।

इस दौरान इंद्राज मीणा, एडवोकेट जितेंद्र दायमा, जगदीश शर्मा, हेमंत, अमन चौधरी, सनी कुमार मीणा, पुखराज जाट, मोहनलाल, शेरसिंह व ओमप्रकाश यादव सहित अन्य निवासी मौजूद रहे।

सिकंदरा में खाद की कालाबाजारी, छापे की भनक लगते ही टीम पहुंचने से पहले खाली कर दिया गया गोदाम

दौसा जिले में जहां किसान यूरिया खाद की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निजी खाद विक्रेताओं द्वारा मनमाने दाम वसूलने और कालाबाजारी करने की शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। किसान एक-एक बोरी खाद के लिए रात-दिन भटक रहे हैं, जबकि कुछ व्यापारी यूरिया का स्टॉक कर इसे दोगुने–तीन गुने दामों पर बेच रहे हैं।

सिकंदरा एवं आसपास के क्षेत्रों में भी इसी तरह की कालाबाजारी की शिकायतें सामने आने के बाद कृषि विभाग की टीम मौके पर पहुंची। लेकिन छापे की भनक लगने के कारण संबंधित गोदाम पहले ही खाली कर दिया गया था।

मनमाने रेट पर यूरिया बेचते दुकानदार

रविवार शाम को सिकंदरा कस्बे की खाद-बीज की दुकानों पर कृषि विभाग ने निरीक्षण किया। टीम के सामने कई दुकानदार सरकारी तय दर से अधिक कीमत पर यूरिया बेचते मिले। इससे जुड़ी वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

कृषि अधिकारी ओमप्रकाश बैरवा ने मौके पर मौजूद ग्रामीणों को उचित दर पर खाद दिलवाया और स्पष्ट संदेश दिया कि—
“यदि कोई दुकानदार निर्धारित दर से अधिक कीमत लेता है, तो तुरंत शिकायत करें।”

न्यूज़ राजस्थान टाइम्स ने किया खुलासा – 270 रुपये का कट्टा 350 रुपये तक बेचा जा रहा था

ग्रामीणों की बार-बार शिकायत के बावजूद संबंधित अधिकारी लंबे समय से कार्रवाई नहीं कर रहे थे।

न्यूज़ राजस्थान टाइम्स द्वारा मामले को उठाने के बाद कृषि विभाग की टीम मौके पर पहुंची, जहाँ ग्रामीणों की शिकायतें सही पाई गईं। दुकानदार यूरिया खाद 270 रुपये का कट्टा 330–350 रुपये तक बेच रहे थे, साथ ही खाद के साथ अन्य उत्पाद भी जबरदस्ती थोपे जा रहे थे।

अब बड़ा सवाल यह है—
क्या विभाग इन कालाबाजारी करने वाले दुकानदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा?

कृषि अधिकारी ओमप्रकाश बैरवा का बयान

“ग्रामीणों एवं मीडिया के माध्यम से सिकंदरा क्षेत्र में चल रही कालाबाजारी की जानकारी मिली। शिकायत पर मौके पर पहुंचकर पाया कि दुकानदार मनमर्जी रेट वसूल रहे थे और अन्य प्रोडक्ट भी जबरन बेचे जा रहे थे। कई ग्रामीणों को उचित रेट पर यूरिया उपलब्ध करवाया। पूरे प्रकरण की सूचना उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।” – ओमप्रकाश बैरवा, कृषि अधिकारी