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राजस्व व्यवस्था शर्मसार: तहसीलदार पर भ्रष्टाचार , फर्जी नामांतरण , अवैध आदेशों से भू-माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लगे गंभीर आरोप

प्राइवेट ड्राइवर तहसीलदार के कमाऊ पूतों के साथ मिलकर ऑफिस में अभी भी कर रहा है दलाली का काम जिसका रिश्वत लेते हुए पहले बन गया था वीडियो

सिकराय | जब किसी तहसीलदार पर लगातार भ्रष्टाचार, दलाली, अवैध नामांतरण और जनता से मनमानी वसूली के आरोप लगते रहे फिर भी एसडीएम और स्थानीय विधायक मौन बने रहे तो सवाल सिर्फ एक अधिकारी पर नहीं बल्कि पूरे सिस्टम के कार्य शैली पर खड़े होते हैं जनता का आरोप है की तहसील कार्यालय में बिना सिफारिश और बिना पैसे की कम होना मुश्किल होता जा रहा है यदि यह सच है तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं बल्कि गरीब और आम नागरिक के अधिकारो खुला शोषण है तहसीलदार हेमेंद्र मीणा एवं उसके कमाऊ पूत गिरदावर,पटवारी की कार्य शैली राजस्व व्यवस्था को लगातार शर्मसार कर रही हैं तहसीलदार द्वारा नियमों की अनदेखी कर लगातार SC और ST की भूमि को जनरल के नाम करने का कार्य लगातार किया जा रहा है एक ऐसा ही मामला पटवार मंडल गीजगढ़ B में आया है उस भूमि का खसरा नंबर 3991/ 1462 है जिसमें पटवारी एवं तहसीलदार ने SC की भूमि को मोटा पैसा खाकर जनरल के नाम कर दिया गीजगढ़ हल्का पटवारी से इस मामले में बात की गई तो उन्होंने बताया कि न्यायिक आदेश के आधार पर भूमि का नामांतरण किया गया है जबकि रिकॉर्ड में शुद्धि पत्र का हवाला देकर भूमि के खातेदारों का फेर बदल किया है जबकि रिकॉर्ड में शुद्धि पत्र भी नहीं किया है संलग्न फिर दोबारा पटवारी से बात की गई तो पटवारी ने कहा कि मैने तो साहब के आदेश की पालना की है मुझे और इस मामले में कुछ भी पता नहीं है इतना कह कर पटवारी ने फोन काट दिया यही नहीं ऐसे कई दर्जनों मामले हैं जिसमें सिकराय तहसीलदार ने भ्रष्टाचार करके स्वयं की तो जेब भरी ही है और राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचाया है सिकंदरा कस्बे में भी एक मामला सामने आया है जिसमें औद्योगिक प्रयोजनार्थ भूमि का नियमों की अनदेखी कर गिरदावर,पटवारी एवं तहसीलदार ने मोटा पैसा खाकर भूमि का खातेदारों में बटवारा कर दिया जब की यह भूमि भी SC की थी पूर्व में आमजन द्वारा तहसीलदार एवं उनके कमाऊ पूतों दर्जनों शिकायत की गई जिस पर पूर्व जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार शिकायत पर जांच कमेटी गठित कर दी और SDM नवनीत कुमार को जांच अधिकारी बनाया उन्होंने करीब 9 महीने बीत जाने के बाद भी आज तक जांच रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया जबकि दौसा कलेक्टर एवं एसडीएम को भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड एवं रिश्वत लेनदेन की वीडियो उपलब्ध करवाई गई थी

विधायक जी की चुप्पी अब सवालों के घेरे में

तहसील में भ्रष्टाचार के आरोप लगातार गूंज रहे हैं, जनता शिकायत पर शिकायत कर रही है, लेकिन स्थानीय विधायक विक्रम बंशीवाल की चुप्पी अब लोगों को खटकने लगी है। जनता तंज कसते हुए कह रही है —“चुनाव के समय जनता की गलियों में हर दर्द दिखाई देता है, लेकिन कुर्सी मिलते ही भ्रष्टाचार भी शायद ‘विकास’ जैसा नजर आने लगता है।”लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर विधायक जी की ऐसी कौन-सी राजनीतिक मजबूरी है कि तहसील में चल रहे कथित भ्रष्टाचार पर एक शब्द तक नहीं निकल रहा?क्या जनता की आवाज अब सिर्फ वोट तक सीमित रह गई है?या फिर सत्ता की खामोशी ही भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी ढाल बन चुकी है?तंज तो यह भी है कि आम आदमी अगर बिजली का बिल लेट भर दे तो नोटिस तुरंत आ जाता है, लेकिन भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों पर जिम्मेदार नेताओं की संवेदनाएं अचानक “मौन व्रत” पर चली जाती हैं।जनता में चर्चा है —“अगर विधायक जनता के सवालों पर भी चुप रहेंगे, तो फिर जनता उन्हें अपना प्रतिनिधि माने या सिर्फ चुनावी मौसम का मेहमान?”अब लोग खुलकर कहने लगे हैं कि“तहसील में भ्रष्टाचार जितना खतरनाक नहीं, उससे ज्यादा खतरनाक जिम्मेदार नेताओं की चुप्पी है… क्योंकि मौन समर्थन कई बार खुले संरक्षण से भी बड़ा माना जाता है।”

एसडीएम साहब की खामोशी अब दफ्तर की दीवारों से बाहर चर्चा का विषय बन चुकी है

तहसील में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगातार उठ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा ऐसा है मानो शिकायतें किसी बंद कमरे में कैद कर दी गई हों। जनता तंज कसते हुए कह रही है —“लगता है एसडीएम कार्यालय में फाइलें नहीं, सिर्फ इंतजार चलता है…इंतजार इस बात का कि जनता थक जाए, शिकायतें पुरानी हो जाएं और सवाल खुद ही दम तोड़ दें।”आखिर ऐसा कौन-सा दबाव है कि गंभीर आरोपों पर भी प्रशासनिक सख्ती दिखाई नहीं देती?क्या एसडीएम की कुर्सी सिर्फ बैठकों और आदेशों के लिए बची है, या भ्रष्टाचार पर कार्रवाई भी उसकी जिम्मेदारी है?तंज तो यह भी है कि आम आदमी की छोटी गलती पर नियमों की पूरी किताब खुल जाती है, लेकिन जब भ्रष्टाचार की शिकायत आती है तो वही नियम शायद फाइलों में “गुम” हो जाते हैं।जनता अब खुलकर कह रही है —“अगर एसडीएम नवनीत कुमार चाह लें तो कई चेहरों से नकाब उतर सकते हैं,लेकिन खामोशी बता रही है कि या तो सिस्टम बेबस है… या फिर बहुत कुछ देखकर भी अनदेखा किया जा रहा है।”सबसे बड़ा सवाल यही है —क्या प्रशासन जनता के भरोसे को बचाएगा,या फिर चुप्पी ही भ्रष्टाचार की सबसे मजबूत ढाल बनी रहेगी?”यदि समय रहते दौसा जिला कलेक्टर ने निष्पक्ष जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की तो जनता का प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से विश्वास पूरी तरह खत्म हो सकता है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी भ्रष्टाचार पर लगाम लगाते हैं या फिर चुप्पी साधकर आरोपों को और मजबूत करते हैं

किसानों की मेहनत पर वार, फसल रौंदकर निकाला रास्ता

पांचोली गांव में सड़क निर्माण को लेकर नियमों की अनदेखी के आरोप

दौसा। सड़क निर्माण कार्य में नियमों की खुली अनदेखी और सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप सामने आए हैं। पूरा मामला सिकराय उपखंड क्षेत्र के पांचोली गांव का है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण से पहले राजस्व विभाग की आवश्यक अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इससे पूरे निर्माण कार्य की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए न तो राजस्व रिकॉर्ड की विधिवत जांच की गई और न ही हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन किया गया। आरोप है कि उपखंड अधिकारी द्वारा मौके की आवश्यक जांच रिपोर्ट तैयार किए बिना और अंतिम स्वीकृति से पहले ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। नियमों के अनुसार भूमि की प्रकृति सरकारी या निजी होने की स्थिति स्पष्ट करना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।


पूर्व आपत्ति के बावजूद जारी रखा गया निर्माण

जानकारी के अनुसार संबंधित भूमि पर पूर्व में भी आपत्ति दर्ज की जा चुकी थी। इसके बावजूद प्रशासन ने निर्माण कार्य को नहीं रोका। ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग की रिपोर्ट के बिना ही योजना को स्वीकृति दे दी गई, जो नियमों के विरुद्ध है।


पुराना रास्ता चालू, फिर भी नया रास्ता बनाया जा रहा

ग्रामीणों ने बताया कि मौके पर पहले से रास्ता मौजूद है। यह रास्ता लगभग 25 वर्ष पूर्व ग्राम पंचायत द्वारा बनवाया गया था और आज भी चालू है। इसके बावजूद प्रशासन ने खड़ी फसल को रौंदकर नए रास्ते का निर्माण शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्रवाई समझ से परे है और इसके पीछे भ्रष्टाचार की आशंका है।


खातेदारों ने लगाए गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप

खातेदार सीताराम गुर्जर और मुकेश गुर्जर ने प्रशासन पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि पटवारी अशोक कुमार की मौका रिपोर्ट और ऑनलाइन नक्शा ट्रेस के अनुसार उनकी भूमि का फ्रंट एरिया 208 मीटर दर्शाया गया है, जबकि मौके पर नापतोल में यह कम पाया गया।

खातेदारों का कहना है कि पूर्व से बना रास्ता भी उनकी निजी खातेदारी भूमि में आ रहा है। यह रास्ता करीब 150 मीटर तक मुकेश गुर्जर की खातेदारी भूमि में पहले से मौजूद है। रास्ते के दूसरी ओर खसरा नंबर 628 स्थित है, जो चरागाह भूमि बताई जा रही है।


सीमा ज्ञान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं

पटवारी अशोक कुमार की रिपोर्ट के अनुसार खसरा नंबर 604 रिकॉर्ड में रास्ता दर्ज है, जिसकी चौड़ाई लगभग चार मीटर है। 8 नवंबर 2024 को हल्का पटवारी पांचोली, पीलोडी, करोड़ी और चांदेरा के पटवारियों ने संयुक्त रूप से विभिन्न खसरों का निरीक्षण किया। इस दौरान सीमा ज्ञान में 12 से 16 मीटर तक का अंतर सामने आया।

इसके बाद संयुक्त टीम ने भू-प्रबंधन विभाग को सीमा ज्ञान के लिए पत्र लिखा। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या भू-प्रबंधन विभाग की टीम ने इस भूमि का सीमा ज्ञान किया या नहीं। खातेदारों का आरोप है कि बिना सीमा ज्ञान के ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया।


हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद निर्माण

खातेदारों का कहना है कि मानपुर-सिकराय रोड पर स्थित उनकी व्यावसायिक भूमि पर हाईकोर्ट का स्थगन आदेश भी है। इसके बावजूद खड़ी फसल के बीच नए रास्ते का निर्माण किया जा रहा है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर किस मजबूरी में प्रशासन ने यह कार्य शुरू कराया।


ग्राम पंचायत से उठे सवाल

खातेदार सीताराम गुर्जर ने बताया कि उनकी खातेदारी भूमि के पास लगभग 25 वर्ष पूर्व तत्कालीन सरपंच खैराती लाल बैरवा ने सीमा ज्ञान के बाद रास्ता बनवाया था। वर्ष 2014 में ग्राम पंचायत ने उसी रास्ते को ग्रेवल सड़क में बदला। इसके बाद 2022 में वर्तमान सरपंच गुलाब बैरवा ने इसी रास्ते का नवीनीकरण कराया, जिस पर लाखों रुपये खर्च किए गए।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि पुराना रास्ता गलत स्थान पर था तो वर्षों तक उस पर सरकारी पैसा क्यों खर्च किया गया। यदि रास्ता सही था, तो अब नए रास्ते के निर्माण की जरूरत क्यों पड़ी। ग्रामीणों ने इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला बताया है।


पटवारी और सरपंच का पक्ष

जब इस मामले में पटवारी अशोक कुमार से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि वे केवल अपने अधिकारियों के आदेशों की पालना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सही और गलत का निर्णय अधिकारी ही करेंगे। सीमा ज्ञान को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।