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राजस्व व्यवस्था शर्मसार: तहसीलदार पर भ्रष्टाचार , फर्जी नामांतरण , अवैध आदेशों से भू-माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लगे गंभीर आरोप

प्राइवेट ड्राइवर तहसीलदार के कमाऊ पूतों के साथ मिलकर ऑफिस में अभी भी कर रहा है दलाली का काम जिसका रिश्वत लेते हुए पहले बन गया था वीडियो

सिकराय | जब किसी तहसीलदार पर लगातार भ्रष्टाचार, दलाली, अवैध नामांतरण और जनता से मनमानी वसूली के आरोप लगते रहे फिर भी एसडीएम और स्थानीय विधायक मौन बने रहे तो सवाल सिर्फ एक अधिकारी पर नहीं बल्कि पूरे सिस्टम के कार्य शैली पर खड़े होते हैं जनता का आरोप है की तहसील कार्यालय में बिना सिफारिश और बिना पैसे की कम होना मुश्किल होता जा रहा है यदि यह सच है तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं बल्कि गरीब और आम नागरिक के अधिकारो खुला शोषण है तहसीलदार हेमेंद्र मीणा एवं उसके कमाऊ पूत गिरदावर,पटवारी की कार्य शैली राजस्व व्यवस्था को लगातार शर्मसार कर रही हैं तहसीलदार द्वारा नियमों की अनदेखी कर लगातार SC और ST की भूमि को जनरल के नाम करने का कार्य लगातार किया जा रहा है एक ऐसा ही मामला पटवार मंडल गीजगढ़ B में आया है उस भूमि का खसरा नंबर 3991/ 1462 है जिसमें पटवारी एवं तहसीलदार ने SC की भूमि को मोटा पैसा खाकर जनरल के नाम कर दिया गीजगढ़ हल्का पटवारी से इस मामले में बात की गई तो उन्होंने बताया कि न्यायिक आदेश के आधार पर भूमि का नामांतरण किया गया है जबकि रिकॉर्ड में शुद्धि पत्र का हवाला देकर भूमि के खातेदारों का फेर बदल किया है जबकि रिकॉर्ड में शुद्धि पत्र भी नहीं किया है संलग्न फिर दोबारा पटवारी से बात की गई तो पटवारी ने कहा कि मैने तो साहब के आदेश की पालना की है मुझे और इस मामले में कुछ भी पता नहीं है इतना कह कर पटवारी ने फोन काट दिया यही नहीं ऐसे कई दर्जनों मामले हैं जिसमें सिकराय तहसीलदार ने भ्रष्टाचार करके स्वयं की तो जेब भरी ही है और राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचाया है सिकंदरा कस्बे में भी एक मामला सामने आया है जिसमें औद्योगिक प्रयोजनार्थ भूमि का नियमों की अनदेखी कर गिरदावर,पटवारी एवं तहसीलदार ने मोटा पैसा खाकर भूमि का खातेदारों में बटवारा कर दिया जब की यह भूमि भी SC की थी पूर्व में आमजन द्वारा तहसीलदार एवं उनके कमाऊ पूतों दर्जनों शिकायत की गई जिस पर पूर्व जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार शिकायत पर जांच कमेटी गठित कर दी और SDM नवनीत कुमार को जांच अधिकारी बनाया उन्होंने करीब 9 महीने बीत जाने के बाद भी आज तक जांच रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया जबकि दौसा कलेक्टर एवं एसडीएम को भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड एवं रिश्वत लेनदेन की वीडियो उपलब्ध करवाई गई थी

विधायक जी की चुप्पी अब सवालों के घेरे में

तहसील में भ्रष्टाचार के आरोप लगातार गूंज रहे हैं, जनता शिकायत पर शिकायत कर रही है, लेकिन स्थानीय विधायक विक्रम बंशीवाल की चुप्पी अब लोगों को खटकने लगी है। जनता तंज कसते हुए कह रही है —“चुनाव के समय जनता की गलियों में हर दर्द दिखाई देता है, लेकिन कुर्सी मिलते ही भ्रष्टाचार भी शायद ‘विकास’ जैसा नजर आने लगता है।”लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर विधायक जी की ऐसी कौन-सी राजनीतिक मजबूरी है कि तहसील में चल रहे कथित भ्रष्टाचार पर एक शब्द तक नहीं निकल रहा?क्या जनता की आवाज अब सिर्फ वोट तक सीमित रह गई है?या फिर सत्ता की खामोशी ही भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी ढाल बन चुकी है?तंज तो यह भी है कि आम आदमी अगर बिजली का बिल लेट भर दे तो नोटिस तुरंत आ जाता है, लेकिन भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों पर जिम्मेदार नेताओं की संवेदनाएं अचानक “मौन व्रत” पर चली जाती हैं।जनता में चर्चा है —“अगर विधायक जनता के सवालों पर भी चुप रहेंगे, तो फिर जनता उन्हें अपना प्रतिनिधि माने या सिर्फ चुनावी मौसम का मेहमान?”अब लोग खुलकर कहने लगे हैं कि“तहसील में भ्रष्टाचार जितना खतरनाक नहीं, उससे ज्यादा खतरनाक जिम्मेदार नेताओं की चुप्पी है… क्योंकि मौन समर्थन कई बार खुले संरक्षण से भी बड़ा माना जाता है।”

एसडीएम साहब की खामोशी अब दफ्तर की दीवारों से बाहर चर्चा का विषय बन चुकी है

तहसील में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगातार उठ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा ऐसा है मानो शिकायतें किसी बंद कमरे में कैद कर दी गई हों। जनता तंज कसते हुए कह रही है —“लगता है एसडीएम कार्यालय में फाइलें नहीं, सिर्फ इंतजार चलता है…इंतजार इस बात का कि जनता थक जाए, शिकायतें पुरानी हो जाएं और सवाल खुद ही दम तोड़ दें।”आखिर ऐसा कौन-सा दबाव है कि गंभीर आरोपों पर भी प्रशासनिक सख्ती दिखाई नहीं देती?क्या एसडीएम की कुर्सी सिर्फ बैठकों और आदेशों के लिए बची है, या भ्रष्टाचार पर कार्रवाई भी उसकी जिम्मेदारी है?तंज तो यह भी है कि आम आदमी की छोटी गलती पर नियमों की पूरी किताब खुल जाती है, लेकिन जब भ्रष्टाचार की शिकायत आती है तो वही नियम शायद फाइलों में “गुम” हो जाते हैं।जनता अब खुलकर कह रही है —“अगर एसडीएम नवनीत कुमार चाह लें तो कई चेहरों से नकाब उतर सकते हैं,लेकिन खामोशी बता रही है कि या तो सिस्टम बेबस है… या फिर बहुत कुछ देखकर भी अनदेखा किया जा रहा है।”सबसे बड़ा सवाल यही है —क्या प्रशासन जनता के भरोसे को बचाएगा,या फिर चुप्पी ही भ्रष्टाचार की सबसे मजबूत ढाल बनी रहेगी?”यदि समय रहते दौसा जिला कलेक्टर ने निष्पक्ष जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की तो जनता का प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से विश्वास पूरी तरह खत्म हो सकता है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी भ्रष्टाचार पर लगाम लगाते हैं या फिर चुप्पी साधकर आरोपों को और मजबूत करते हैं

नशे का अवैध कारोबार बेलगाम,युवाओं का भविष्य दांव पर—बीट प्रभारियों की मेहरबानी युवा पीढ़ी पर पड़ रही भारी

रिश्तों की मर्यादा है हुई तार-तार! बेटे पर मां से दुष्कर्म का मामला दर्ज

दौसा – जिले में रिश्तों की मर्यादा तार-तार करने का मामला सामने आया. मां ने अपने गर्भ में जिस बेटे को नौ माह रखा, उसी पर मां से दुष्कर्म करने का गंभीर प्रकरण दर्ज हुआ है. यह मामला सिर्फ पुलिस रजिस्टर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि क्षेत्र में चर्चा और हैरानी का विषय बन गया
रामगढ़ पचवारा थाना प्रभारी मदन लाल ने बताया कि पीड़िता के दो बेटे हैं. बड़े बेटे के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है. पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया. पुलिस टीम ने घटनास्थल पर परिस्थितियों की जांच की. कमरे की स्थिति, दरवाजों के लॉक, पीड़िता के बयान और संभावित डिजिटल साक्ष्य जांच में शामिल किए. पुलिस जांच में जुट गई है

पति ने दर्ज कराया केस

घटना बुधवार देर रात की बताई जा रही है, जब पीड़िता अपने कमरे में अकेली सो रही थी. तभी बड़ा बेटा कमरे में आया और दुष्कर्म कर भाग गया. मामले की जानकारी पीड़िता के पति को लगी तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. उसने तुरंत थाने जाकर अपने बेटे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया

जांच में जुटी पुलिस – एसएचओ मदनलाल ने बताया कि पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या आरोपी नशे में था. क्या पहले भी किसी तरह का विवाद या अप्राकृतिक व्यवहार देखा गया था. क्या परिवार में कोई अंदरूनी तनाव चल रहा था. जांच अधिकारी का कहना है कि हर पहलू की जांच होगी

अनुपम अपार्टमेंट, प्रताप नगर में बदहाल व्यवस्था — निवासियों ने उप आवासन आयुक्त से की त्वरित हस्तक्षेप की मांग

जयपुर ( न्यूज़ राजस्थान टाइम्स )। प्रताप नगर स्थित अनुपम अपार्टमेंट (राजस्थान हाउसिंग बोर्ड अंतर्गत) में रह रहे सैकड़ों परिवार इस समय गंभीर अव्यवस्थाओं से परेशान हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद समस्याओं का समाधान न होने पर निवासियों ने उप आवासन आयुक्त श्री संजय शर्मा को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

आपकी आवाज़, भरोसे के साथ

सफाई व्यवस्था चरमराई — स्वच्छता बनाए रखना मुश्किल


निवासियों ने बताया कि पूरे परिसर में मात्र 5–7 सफाईकर्मी नियुक्त हैं, जिससे रोजाना स्वच्छता बनाए रखना संभव नहीं हो पाता। कचरा उठाने वाली गाड़ी भी नियमित नहीं आती, जिसके कारण कई जगहों पर कचरा जमा हो रहा है।

लिफ्टें बंद, बुजुर्ग और महिलाएँ सबसे ज्यादा प्रभावित


बी1 ब्लॉक की लिफ्ट अब तक शुरू नहीं हो सकी है। वहीं A3, A4 और A5 ब्लॉक की लिफ्ट लंबे समय से खराब पड़ी हैं। अन्य ब्लॉकों में भी लिफ्टों की लाइट, फायर अलार्म और पैनल सिस्टम क्षतिग्रस्त हैं। निवासियों ने इसे दुर्घटना का बड़ा खतरा बताया और सभी लिफ्टों के तत्काल मेंटेनेंस की मांग की।

सुरक्षा व्यवस्था कमजोर — रात में छेड़छाड़ और चोरी की घटनाएँ


वर्तमान में केवल दो सुरक्षा गार्ड ड्यूटी पर हैं, जिससे इतने बड़े परिसर की निगरानी असंभव है। निवासियों ने रात्रिकालीन सुरक्षा बढ़ाने, अतिरिक्त गार्ड तैनात करने और मुख्य गेट पर 4 CCTV कैमरे लगाने की मांग की है।

अधूरे कार्यों का बोझ झेल रहे हैं निवासी


निवासियों ने आरोप लगाया कि राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने बिना मेंटेनेंस पूरा किए ही कब्जे दे दिए। कई जगह ब्लॉकों के बीच सुरक्षा प्लेटें तक नहीं लगाई गईं, जो गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।

पानी की सप्लाई भी संकटग्रस्त


सोसाइटी में 4 बोरिंग होने के बावजूद केवल एक ही मोटर चालू है, जिससे सभी 9 ब्लॉक्स में पानी सप्लाई की जा रही है। लगातार भार से मोटर के खराब होने का खतरा बना रहता है। निवासियों ने शेष 3 बोरिंग में भी मोटर लगाने की मांग रखी।

चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सामने आई अनियमितताएँ


स्थानीय निवासी राजेंद्र सिंह कसाना ने बताया कि सोसाइटी में अभी तक चुनाव नहीं हुए हैं और निवासियों ने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी लोग पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से चुनावी अधिकार हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। निवासियों का स्पष्ट कहना है कि मतदान का अधिकार केवल वास्तविक अधिकृत कब्जाधारकों को ही मिले।

कार्रवाई न होने पर बढ़ती नाराज़गी


निवासियों ने बताया कि इन मुद्दों को कई बार लिखित में RHB को भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है और वे तत्काल समाधान की मांग कर रहे हैं।

निवासियों का स्पष्ट संदेश


“सोसाइटी की समस्याएँ अब दैनिक जीवन, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को प्रभावित करने लगी हैं। आवासन मंडल तत्काल हस्तक्षेप करे,” निवासियों ने ज्ञापन में लिखा।

इस दौरान इंद्राज मीणा, एडवोकेट जितेंद्र दायमा, जगदीश शर्मा, हेमंत, अमन चौधरी, सनी कुमार मीणा, पुखराज जाट, मोहनलाल, शेरसिंह व ओमप्रकाश यादव सहित अन्य निवासी मौजूद रहे।

सिकंदरा में खाद की कालाबाजारी, छापे की भनक लगते ही टीम पहुंचने से पहले खाली कर दिया गया गोदाम

दौसा जिले में जहां किसान यूरिया खाद की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निजी खाद विक्रेताओं द्वारा मनमाने दाम वसूलने और कालाबाजारी करने की शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। किसान एक-एक बोरी खाद के लिए रात-दिन भटक रहे हैं, जबकि कुछ व्यापारी यूरिया का स्टॉक कर इसे दोगुने–तीन गुने दामों पर बेच रहे हैं।

सिकंदरा एवं आसपास के क्षेत्रों में भी इसी तरह की कालाबाजारी की शिकायतें सामने आने के बाद कृषि विभाग की टीम मौके पर पहुंची। लेकिन छापे की भनक लगने के कारण संबंधित गोदाम पहले ही खाली कर दिया गया था।

मनमाने रेट पर यूरिया बेचते दुकानदार

रविवार शाम को सिकंदरा कस्बे की खाद-बीज की दुकानों पर कृषि विभाग ने निरीक्षण किया। टीम के सामने कई दुकानदार सरकारी तय दर से अधिक कीमत पर यूरिया बेचते मिले। इससे जुड़ी वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

कृषि अधिकारी ओमप्रकाश बैरवा ने मौके पर मौजूद ग्रामीणों को उचित दर पर खाद दिलवाया और स्पष्ट संदेश दिया कि—
“यदि कोई दुकानदार निर्धारित दर से अधिक कीमत लेता है, तो तुरंत शिकायत करें।”

न्यूज़ राजस्थान टाइम्स ने किया खुलासा – 270 रुपये का कट्टा 350 रुपये तक बेचा जा रहा था

ग्रामीणों की बार-बार शिकायत के बावजूद संबंधित अधिकारी लंबे समय से कार्रवाई नहीं कर रहे थे।

न्यूज़ राजस्थान टाइम्स द्वारा मामले को उठाने के बाद कृषि विभाग की टीम मौके पर पहुंची, जहाँ ग्रामीणों की शिकायतें सही पाई गईं। दुकानदार यूरिया खाद 270 रुपये का कट्टा 330–350 रुपये तक बेच रहे थे, साथ ही खाद के साथ अन्य उत्पाद भी जबरदस्ती थोपे जा रहे थे।

अब बड़ा सवाल यह है—
क्या विभाग इन कालाबाजारी करने वाले दुकानदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा?

कृषि अधिकारी ओमप्रकाश बैरवा का बयान

“ग्रामीणों एवं मीडिया के माध्यम से सिकंदरा क्षेत्र में चल रही कालाबाजारी की जानकारी मिली। शिकायत पर मौके पर पहुंचकर पाया कि दुकानदार मनमर्जी रेट वसूल रहे थे और अन्य प्रोडक्ट भी जबरन बेचे जा रहे थे। कई ग्रामीणों को उचित रेट पर यूरिया उपलब्ध करवाया। पूरे प्रकरण की सूचना उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।” – ओमप्रकाश बैरवा, कृषि अधिकारी

अनुपम अपार्टमेंट में बढ़ती समस्याएँ, बिना पूरा काम हुए दे दिया गया था पजेशन — आवासन मंडल पर उठ रहे सवाल

जयपुर। प्रताप नगर सेक्टर–26 में हाल ही में निर्मित अनुपम अपार्टमेंट में रहने वाले निवासियों की परेशानियाँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्थिति यह है कि अपार्टमेंट का निर्माण कार्य पूरी तरह पूरा हुए बिना ही निवासियों को पज़ेशन दे दिए गए, जिसके बाद से लोग कई गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

अपार्टमेंट में लिफ्ट की बार-बार खराबी, ब्लॉकों के बीच खतरनाक खाली जगह, पानी की अनियमित आपूर्ति, अधूरा पड़ा मेंटेनेंस कार्य, चोरी की घटनाएँ, तथा साफ–सफाई की बेहद खराब स्थिति जैसी समस्याएँ लगातार बनी हुई हैं। निवासियों का कहना है कि इन समस्याओं की सूचना राजस्थान आवासन मंडल को कई बार दी जा चुकी है, लेकिन अब तक किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

स्थानीय समाजसेवी एवं कसाना ब्रदर्स एंटरटेनमेंट के संस्थापक राजेंद्र गुर्जर ने बताया कि अपार्टमेंट का निर्माण अधूरा होने के बावजूद लोगों को पज़ेशन दे दिया गया, जिससे आज निवासी दिक्कतों के बीच रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा—

“अनुपम अपार्टमेंट का निर्माण अधूरा है और मूलभूत सुविधाएँ भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। विभाग को बिना संपूर्ण कार्य पूर्ण किए पज़ेशन नहीं देना चाहिए था। आज निवासियों को लिफ्ट, पानी, साफ–सफाई और सुरक्षा जैसी आवश्यक सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।”

निवासियों का कहना है कि

  • लिफ्ट की खराबी से बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी होती है।
  • ब्लॉकों के बीच बड़ा गैप लगातार दुर्घटना का खतरा पैदा कर रहा है।
  • पानी की अनियमित सप्लाई से दिनभर की दिनचर्या प्रभावित होती है।
  • मेंटेनेंस कार्य अधूरा है और कई जगहों पर निर्माण की कमियाँ साफ दिखाई देती हैं।
  • चोरी की घटनाएँ बढ़ने से असुरक्षा का वातावरण है।
  • और साफ–सफाई की कमजोर व्यवस्था स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रही है।

निवासियों ने आवासन मंडल से मांग की है कि वह तुरंत प्रभाव से निर्माण की कमियों को दूर करे और सभी सुविधाएँ पूर्ण रूप से उपलब्ध कराए, ताकि लोग सुरक्षित और सहज वातावरण में रह सकें।

दौसा (बांदीकुई) – बड़ी खबर: भांवता गांव में 17 वर्षीय छात्र का संदिग्ध अवस्था में मिला शव, क्षेत्र में मचा हड़कंप


रिपोर्ट – न्यूज़ राजस्थान टाइम्स (आर.एस. कसाना)

दौसा जिले के बांदीकुई उपखंड के भांवता गांव में शुक्रवार सुबह 17 वर्षीय छात्र महेश योगी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। महेश, जो कक्षा 12 का छात्र था, गुरुवार सुबह स्कूल जाने की बात कहकर घर से निकला था, लेकिन वह वापस नहीं लौटा।

शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने खेतों के पास महेश का शव देखा और तुरंत कोलवा थाना पुलिस को सूचित किया। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है तथा पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।

फिलहाल मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। पुलिस के अनुसार प्राथमिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह पता चल सकेगा कि मामला हत्या, दुर्घटना या किसी अन्य कारण से जुड़ा है।

उधर, ग्रामीणों ने घटना को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि छात्र की रहस्यमयी मौत कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है, जिनका जवाब पुलिस को जल्द देना चाहिए।

कोलवा थाना पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है और जल्द ही तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

सांगानेर में हरिशंकर रेस्टोरेंट की छत गिरी, मचा हड़कंप — बाल-बाल बचे लोग

न्यूज़ राजस्थान टाइम्स (आर.एस. कसाना) | जयपुर
जयपुर के सांगानेर क्षेत्र में बुधवार दोपहर बड़ा हादसा टल गया, जब हरिशंकर रेस्टोरेंट की छत अचानक ढह गई। हादसे के वक्त रेस्टोरेंट में कई ग्राहक और कर्मचारी मौजूद थे। गनीमत यह रही कि सभी लोग समय रहते बाहर निकल गए, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छत का एक हिस्सा अचानक तेज आवाज के साथ नीचे गिर पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। आसपास के दुकानदारों और राहगीरों ने तुरंत बचाव कार्य में मदद की और स्थानीय प्रशासन को सूचना दी।

सूचना मिलते ही सांगानेर थाना पुलिस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और रेस्टोरेंट के पूरे ढांचे को सुरक्षा कारणों से घेर लिया गया। प्रारंभिक जांच में अनुमान लगाया जा रहा है कि पुरानी छत में नमी और कमजोर निर्माण के कारण यह हादसा हुआ।

फायर ब्रिगेड और निगम इंजीनियरों की टीम ने मौके पर पहुंचकर भवन की स्थिरता की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन ने रेस्टोरेंट को फिलहाल बंद रखने और पूरे ढांचे की तकनीकी जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रेस्टोरेंट पुरानी बिल्डिंग में चल रहा था और कई बार छत से पानी टपकने की शिकायत की जा चुकी थी, लेकिन कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया।

यह घटना सांगानेर क्षेत्र में बिल्डिंग सेफ्टी और रेगुलर इंस्पेक्शन की लापरवाही को भी उजागर करती है।
फिलहाल हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन प्रशासन ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

CGST टीम ने मेहंदीपुर बालाजी में स्थित होटल में मारा छापा

CGST विभाग ने मेहंदीपुर बालाजी स्थित होटल में टैक्स चोरी के आरोप में छापा मारकर सभी लेन-देन के रिकॉर्ड जब्त कर लिए
न्यूज राजस्थान टाइम्स ( आर एस कसाना ) दौसा – जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मेहंदीपुर बालाजी में मंगलवार को सेंट्रल जीएसटी (CGST) विभाग की टीम ने एक होटल में कार्रवाई की. विभाग की टीम ने होटल पहुंचकर वहां के सभी लेन-देन और बिलिंग रिकॉर्ड जब्त कर लिए. इस कार्रवाई से पूरे होटल व्यवसाय में हड़कंप मच गया
सीजीएसटी विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर सीताराम मीना ने बताया कि उनके नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई. टीम ने होटल की जीएसटी रजिस्ट्रेशन डिटेल, बुकिंग रिकॉर्ड, बिल एंट्री और टैक्स पेमेंट से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की. बताया जा रहा है कि विभाग को होटल में जीएसटी चोरी और टैक्स में अनियमितताओं की शिकायत मिली थी, जिसके आधार पर यह छापा मारा गया
टीम ने होटल में मौजूद कंप्यूटर सिस्टम, कैश बुक और ऑनलाइन व ऑफलाइन बुकिंग से जुड़े डेटा की भी जांच की. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि होटल ने कितनी बुकिंग्स पर टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किए या फर्जी बिल जारी किए हैं. विभाग ने होटल के प्रबंधन से कई दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. मीना ने बताया कि शिकायत के आधार पर होटल पर छापा मारा गया है. होटल के सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है. गड़बड़ी पाई जाने पर संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी

होटल व्यवसायियों में मचा हड़कंप -मेहंदीपुर बालाजी में हर दिन हजारों श्रद्धालु देशभर से दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इसी वजह से यहां होटल व्यवसाय तेजी से फल-फूल रहा है, लेकिन टैक्स चोरी की शिकायतों के बाद अब CGST विभाग की निगाहें स्थानीय होटल उद्योग पर टिकी हैं. अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अनियमितता पाई गई, तो भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद इलाके के कई होटल संचालकों में अफरा-तफरी का माहौल है

इतिहास का प्रतिबिंब लापता, प्रशासन मौन — रानी बाग की पहचान खतरे मेंनिगरानी में भारी लापरवाही उजागर, विरासत संरक्षण पर उठे गंभीर सवाल

न्यूज़ राजस्थान टाइम्स | आर.एस. कसाना | जयपुर

राजधानी जयपुर के ट्रांसपोर्ट नगर से गलता जी की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित रानी का बाग, जो अपनी ऐतिहासिक और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है, इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, रानी बाग के प्रवेश द्वारों पर लगे पुराने एंटीक शीशे (Antique Mirrors) रहस्यमय तरीके से गायब हो गए हैं। ये शीशे कई दशकों पुराने थे और राजशाही काल की वास्तुकला के जीवंत अवशेष माने जाते थे।


इतिहास की झलक

माना जाता है कि रानी का बाग कभी शाही परिवार की महिलाओं के विश्राम स्थल के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। उस दौर में रथों और गाड़ियों की आवाजाही पर नज़र रखने के लिए प्रवेश द्वारों पर विशेष कोण पर शीशे लगाए गए थे, ताकि अंदर-बाहर आने वालों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके। समय के साथ भले ही इस स्थल का स्वरूप बदला, लेकिन ये शीशे जयपुर की शाही विरासत के प्रतीक बने रहे।

पास के दुकानदारों का कहना है कि यह शीशे कई वर्षों से यथावत थे, परंतु पिछले कुछ दिनों में रहस्यमय ढंग से गायब हो गए। एक स्थानीय निवासी ने बताया — “रात के समय किसी ने इन्हें निकाल लिया होगा। ये बहुत पुराने और महंगे शीशे थे, पहले इनमें गाड़ियों का प्रतिबिंब दूर से दिख जाता था।”

कई लोगों का अनुमान है कि यह छोटे स्तर पर की गई चोरी हो सकती है, संभवतः चोरी करने वालों को इस धरोहर की ऐतिहासिक महत्ता का अंदाजा नहीं था।


प्रशासनिक अनदेखी उजागर

जब इस विषय पर RSC होम गार्ड के कर्मचारियों से बात की गई, जो वर्तमान में परिसर की निगरानी करते हैं, तो किसी के पास स्पष्ट जवाब नहीं था।
एक कर्मी ने कहा — “हमें जानकारी ही नहीं थी कि शीशे गायब हो गए हैं,”
दूसरे ने जोड़ा — “शायद किसी ने तोड़ दिए होंगे, रात में कोई आवाज नहीं सुनी।”

यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावहीन है।
और भी चिंताजनक यह है कि पुरातत्व विभाग या नगर निगम (हेरिटेज जोन) को अब तक कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में किसी प्रकार की रिपोर्ट या शिकायत दर्ज नहीं हुई, जिससे यह स्पष्ट है कि विरासत संरक्षण को लेकर संवेदनशीलता का अभाव है।


कला और कारीगरी का अनमोल नमूना

स्थानीय इतिहासकारों का कहना है कि इन शीशों की कीमत लाखों रुपये में हो सकती है। माना जाता है कि यह शीशे बेल्जियम और ईरान से विशेष रूप से मंगवाए गए थे और हाथ से जड़ी पीतल की बॉर्डर में जड़े हुए थे। आज ऐसे शीशे बेहद दुर्लभ हैं और उनका गायब हो जाना संस्कृति संरक्षण की लापरवाही का प्रतीक है।


स्थानीय निवासियों की अपील

रानी बाग के आसपास के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की सघन जांच कराई जाए। साथ ही परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने, रात्री गश्त बढ़ाने, और सभी ऐतिहासिक हिस्सों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की भी मांग की गई है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की क्षति का तुरंत पता लगाया जा सके।


प्राचीन संरचनाओं की उपेक्षा का प्रतीक

खबर लिखे जाने तक किसी भी विभाग से कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, नगर निगम हेरिटेज विंग ने इस प्रकरण की प्रारंभिक जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है और जल्द एक फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट तैयार की जा सकती है।

रानी बाग के ये शीशे केवल कांच के टुकड़े नहीं थे, बल्कि जयपुर की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा थे।
उनका यूं गायब हो जाना इस बात का प्रतीक है कि हम अपने अतीत की रक्षा में कितने लापरवाह हो गए हैं।

न्यूज़ राजस्थान टाइम्स के कैमरे से ली गई तस्वीरों में साफ दिखाई देता है कि जहां पहले बड़ा एंटीक शीशा लगा था, वहां अब केवल खाली लाल फ्रेम बचा है — जो कभी इतिहास का प्रतिबिंब दिखाता था, आज खालीपन का प्रतीक बन गया है।