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पटवार घर सूना, ई-मित्र पर दस्तखत—सिकंदरा पटवारी पर अवैध वसूली के आरोप

जनसुनवाई बनी औपचारिकता, सिकंदरा के लोग न्याय के लिए भटकने को मजबूर

जिले की सिकंदरा उपतहसील के अंतर्गत सिकंदरा ग्राम पंचायत में पटवारी पद पर आसीन जीवन राम मीना की कार्य शैली पर ग्रामीणों द्वारा लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं स्थानीय लोगों का कहना है कि पटवारी जीवनराम मीणा महीने में बहुत कम ड्यूटी पर आते हैं और जब आते हैं तो पटवार घर में न मिलकर मिलते हैं ई मित्र की दुकानों पर और जिन कागजातों में पटवारी के हस्ताक्षर जरुरी होते हैं उनमें हस्ताक्षर कराने के लिए लोग आए दिन पटवार घर के चक्कर काटते रहते हैं लेकिन पटवारी मौके पर नहीं मिलता है फोन करते हैं तो फोन नहीं उठाते हैं गलती से यदि फोन उठा लिया तो उनका जवाब यही रहता है कि मैं फिल्ड में हूं अभी समय लगेगा आपको यदि जल्दी है तो आप ई मित्र की दुकान कागज रख दो मैं देख लूंगा

स्थानीय लोगों ने सिकंदरा पटवारी पर अवैध वसूली का आरोप लगाते हुए कहा कि सिकंदरा में अलवर गंगापुर मेगा हाईवे पर लकड़ी मंडी संचालित है जहां आए दिन सैकड़ो वाहनों की संख्या में हरे पेड़ों की लकड़ी काटकर लाई जाती है इन पर कार्यवाही करने की जिम्मेदारी पटवारी की भी बनती है लेकिन इन पर कार्रवाई न करने का कारण आखिर अवैध वसूली नहीं है तो क्या है ? लगातार प्रकृति प्रेमियों की शिकायत के बाद भी इसी ग्राम पंचायत में से हजारों की संख्या में पेड़ कट गए और उन्हें लकड़ी मंडी में लाकर बेच दिया गया ऐसे गैर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ प्रशासन आखिर कार्यवाही क्यों नहीं कर रहा है ?

सिकंदरा ग्राम पंचायत के सरपंच कैप्टन रामावतार सैनी का कहना है कि आए दिन जरूरतमंद स्थानीय लोग मेरे पास फोन करते हैं और पूछते हैं कि आपकी ग्राम पंचायत का पटवारी कहां पर है तब मैं पटवारी को फोन करता हूं तो पटवारी फोन नहीं उठाता है पटवारी की गैर जिम्मेदारियों को देखते हुए जनसुनवाई के अलावा उपखंड कार्यालय में उपस्थित होकर उपखंड अधिकारी को लिखित एवं मौखिक तौर पर उसकी शिकायत दी है जिस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है आए दिन लोग पटवार घर एवं ग्राम पंचायत के चक्कर काटते रहते हैं जब उन्हें मौके पर पटवारी नहीं मिलता है तो निराश होकर वापस लौट जाते हैं सिकंदरा उप तहसीलदार डी आर मीना से पटवारी जीवन राम मीणा पटवार घर एवं उप तहसील कार्यालय में नहीं आने का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मैं खुद भी इससे परेशान हूं यह न तो मेरा फोन उठाता है और आए दिन ड्यूटी पर न आकर फरार रहता है इसके बारे में मैंने सिकराय उपखंड अधिकारी को अवगत पहले ही करवा दिया था

अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सिकराय उपखंड अधिकारी (एसडीएम) की कार्यशैली को लेकर खड़ा हो गया है।स्थानीय लोगों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और प्रकृति प्रेमियों का आरोप है कि इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद एसडीएम स्तर पर जानबूझकर आंखें मूंदी गई हैं।जब पटवारी महीनों तक ड्यूटी से नदारद रहता है उप तहसीलदार खुद लिखित रूप से शिकायत करने की बात स्वीकार करता हैसरपंच द्वारा जनसुनवाई और कार्यालय में शिकायत दी जाती हैअवैध खनन, लकड़ी कटान और परिवहन खुलेआम चलता है। तो सवाल उठता है कि आखिर एसडीएम सिकराय किस दबाव या संरक्षण में कार्रवाई नहीं कर रहे?स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पटवारी पर कार्रवाई नहीं हो रही, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि उच्च स्तर का संरक्षण प्रतीत होता है।क्या यह संरक्षण बिना किसी लाभ के संभव है? क्या अवैध खनन और लकड़ी माफिया को प्रशासनिक शह मिल रही है?प्रकृति प्रेमियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार लिखित व मौखिक रूप से एसडीएम सिकराय को हरे पेड़ों की कटाई, अवैध खनन और लकड़ी मंडी की जानकारी दी, लेकिन हर बार फाइलें दबा दी गईं और कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।लोगों का कहना है कि“यदि एसडीएम चाहें तो एक दिन में कार्रवाई हो सकती है, लेकिन जानबूझकर चुप्पी साधी गई है।”यह चुप्पी अब मनमानी और संदिग्ध कार्यशैली के आरोपों में बदल चुकी है।आमजन का सवाल है कि क्या प्रशासन आम लोगों और प्रकृति के खिलाफ खड़ा है?क्या सरकारी पद का उपयोग जनता की सेवा के बजाय अवैध गतिविधियों को ढाल देने के लिए किया जा रहा है?यदि यही हाल रहा, तो आने वाले समय में न पर्यावरण बचेगा,न प्रशासन पर जनता का भरोसा और न ही कानून का भय अब जनता और प्रकृति प्रेमियों ने मांग की है कि सिकराय एसडीएम की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो पटवारी जीवनराम मीणा सहित जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई हो अवैध खनन और लकड़ी कटान पर तत्काल सख्त रोक लगे।

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