नशे का अवैध कारोबार बेलगाम,युवाओं का भविष्य दांव पर—बीट प्रभारियों की मेहरबानी युवा पीढ़ी पर पड़ रही भारी
दौसा ( रामवीर कसाना )
जिले में नशे का अवैध कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। गांव और कस्बों तक फैल चुके इस काले धंधे ने युवाओं को अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि कई जगहों पर खुलेआम नशे की बिक्री की शिकायतें होने के बावजूद भी ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस अवैध कारोबार को किसका संरक्षण मिल रहा है ? सिकंदरा कस्बे के स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से नशे का अवैध कारोबार चल रहा है। युवाओं को सस्ती दरों पर नशीले पदार्थ उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे कई परिवारों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी जिम्मेदार विभाग इस गंभीर समस्या पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं कर रहे।
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रामजीलाल ओड का कहना है कि नशे का बढ़ता कारोबार सिर्फ कानून व्यवस्था की चुनौती नहीं बल्कि समाज के भविष्य पर भी बड़ा खतरा है। नशे की गिरफ्त में आने के बाद युवा अपराध की राह पर भी बढ़ सकते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र का माहौल बिगड़ने की आशंका रहती है।
भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष अमरसिंह कसाना ने प्रशासन से मांग की है कि नशे के अवैध कारोबार में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और स्थानीय पुलिस की मेहरबानी से ही नशे का अवैध कारोबार फल फूल रहा है स्थानीय पुलिस चाहे तो सिकंदरा कस्बे में हो रहे नशे के अवैध कारोबार पर रोक लग सकती है और विशेष अभियान चलाकर युवाओं को इस दलदल से बाहर निकाला जा सकता है
सवालों के घेरे में प्रशासन: नशे का अवैध कारोबार आखिर किसकी शह पर ?
क्षेत्र में तेजी से फैल रहे नशे के अवैध कारोबार ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन से सीधे सवाल: पुलिस प्रशासन से सवाल:
आखिर क्यों नशे के बड़े सप्लायर अब तक पकड़ से बाहर हैं ?
छोटे-मोटे कार्रवाई दिखाकर बड़े नेटवर्क को बचाने का खेल तो नहीं चल रहा ?
क्या स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के बिना यह कारोबार संभव है ?
जिला प्रशासन से सवाल:
लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई क्यों नहीं ?
क्या अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए कोई विशेष अभियान चलाया गया ?
जनता की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की प्राथमिकता क्या है ?
अन्य संबंधित विभागों से सवाल (आबकारी/नारकोटिक्स):
क्षेत्र में अवैध नशे की सप्लाई की निगरानी कैसे की जा रही है ?
क्या नियमित छापेमारी केवल कागजों तक सीमित है?
आखिर क्यों बड़े गिरोहों तक पहुंच नहीं बन पा रही ?
जनता का गुस्सा
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतें करने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। युवाओं का भविष्य दांव पर है और जिम्मेदार तंत्र चुप्पी साधे बैठा है।
बड़ा सवाल
क्या नशे का यह अवैध कारोबार प्रशासन की नाकामी है या फिर किसी संरक्षण में फल-फूल रहा है ?

