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अवैध खनन का संगठित खेल,धरती छलनी सिस्टम खामोश

जिम्मेदार भ्रष्ट अधिकारीयो के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं ?

जिम्मेदारी तय क्यों नहीं?

जिले में अवैध खनन अब छिपा हुआ अपराध नहीं, बल्कि खुलेआम चल रहा संगठित धंधा बन चुका है। नदियों के किनारे, पहाड़ियों और कृषि भूमि में बिना पट्टा, बिना अनुमति और बिना पर्यावरण स्वीकृति के खनन जारी है। हैरानी यह कि यह सब प्रशासन की निगरानी में होने के बावजूद रुक नहीं रहा।स्थानीय लोगों के अनुसार, रात होते ही भारी मशीनें सक्रिय हो जाती हैं और सुबह तक खनिज से भरे ओवरलोड वाहन सड़कों पर पुलिस के सामने ही दौड़ते दिखते हैं। कई बार शिकायतों और धरपकड़ के बाद भी कुछ ही दिनों में वही माफिया फिर सक्रिय हो जाते हैं।

ज़मीनी हकीकत बिना पट्टा खनन स्थलों पर मशीनों की खुली आवाजाहीओवरलोड वाहनों से सड़कों और पुलों को नुकसाननदियों का प्राकृतिक बहाव बाधित, भू-जल स्तर गिराकृषि भूमि बंजर होने की कगार परसूत्रों का दावा है कि अवैध खनन से सरकार को लाखों–करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि कार्रवाई के नाम पर कभी-कभार वाहनों की जब्ती और मामूली जुर्माना लगाकर मामला निपटा दिया जाता है।

1️⃣ जिन स्थानों पर बार-बार अवैध खनन पकड़ा गया, वहाँ आज तक स्थायी रोक क्यों नहीं लगाई गई?

2️⃣ दिन रात भारी मशीनें और ओवरलोड वाहन चल रहे हैं—क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है?

3️⃣ कार्रवाई के नाम पर सिर्फ वाहनों की जब्ती और मामूली जुर्माना—क्या यही माफिया पर लगाम लगाने का तरीका है?

4️⃣ जब्त वाहनों और मशीनों को दोबारा कैसे छोड़ा गया, किसके आदेश पर?

5️⃣ अवैध खनन से सरकार को हुए वास्तविक राजस्व नुकसान का आकलन कब किया गया?

6️⃣ क्या अब तक किसी बड़े सरगना या संरक्षण देने वाले अधिकारी पर कार्रवाई हुई है?

7️⃣ पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के लिए कौन जिम्मेदार तय किया गया?

8️⃣ शिकायत करने वाले स्थानीय लोगों को डराने या दबाने की शिकायतों पर क्या कदम उठाए गए?

9️⃣ अवैध खनन रोकने के लिए ड्रोन निगरानी, सीसीटीवी या विशेष टास्क फोर्स कब सक्रिय होगी?

🔟 जनता को यह भरोसा कब मिलेगा कि कानून सबके लिए बराबर है, माफिया के लिए नहीं?अवैध खनन केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा है। अब देखना यह है कि कार्रवाई कागज़ों तक सीमित रहती है या सच में माफिया और संरक्षण देने वालों तक पहुँचती है। क्या जिला कलेक्टर अब उपखंड अधिकारी, फॉरेस्ट विभाग, खनन विभाग एवं संबंधित थाना अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर कोई ठोस कदम उठाएंगे ?

पूर्व मंत्री हेमसिंह भड़ाना का निधन

जयपुर | भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हेम सिंह भड़ाना का आकस्मिक निधन हो गया। भड़ाना के निधन से भारतीय जनता पार्टी ने एक प्रखर और तेज तर्रार नेता खो दिया। वहीं गुर्जर समाज ने भी समाज का हीरा जो समाज के लिए हमेशा संघर्ष करता रहा है निधन होने से बड़ी क्षति हुई है।पूर्व मंत्री हेमसिंह भड़ाना के निधन पर मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने भी शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि“भाजपा राजस्थान के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री हेमसिंह भडाणा जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है।भडाणा जी ने सदैव जनहित और प्रदेश के विकास को प्राथमिकता दी। उनका निधन भाजपा परिवार और राजस्थान की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।”ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ प्रेमचंद बैरवा ने भी पूर्व कैबिनेट मंत्री हेम सिंह भड़ाना के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि,,,“भाजपा राजस्थान के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री हेमसिंह भडाणा जी के निधन का अत्यंत दुःखद समाचार प्राप्त हुआ।भडाणा जी का संपूर्ण जीवन जनसेवा, संगठन की मजबूती और राजस्थान के विकास को समर्पित रहा। उनका सरल व्यक्तित्व और समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।उनका जाना न केवल भाजपा परिवार, बल्कि राजस्थान की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवारजनों एवं समर्थकों को यह गहन दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।”भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी हेम सिंह भड़ाना के निधन पर शोक व्यक्त किया उन्होंने कहा कि,,,“भाजपा राजस्थान के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री हेमसिंह भडाणा जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।भडाणा जी ने अपने सार्वजनिक जीवन में सदैव जनहित, संगठन की मजबूती और राजस्थान के विकास को सर्वोपरि रखा। उनका निधन भाजपा परिवार तथा प्रदेश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है

पटवार घर सूना, ई-मित्र पर दस्तखत—सिकंदरा पटवारी पर अवैध वसूली के आरोप

जनसुनवाई बनी औपचारिकता, सिकंदरा के लोग न्याय के लिए भटकने को मजबूर

जिले की सिकंदरा उपतहसील के अंतर्गत सिकंदरा ग्राम पंचायत में पटवारी पद पर आसीन जीवन राम मीना की कार्य शैली पर ग्रामीणों द्वारा लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं स्थानीय लोगों का कहना है कि पटवारी जीवनराम मीणा महीने में बहुत कम ड्यूटी पर आते हैं और जब आते हैं तो पटवार घर में न मिलकर मिलते हैं ई मित्र की दुकानों पर और जिन कागजातों में पटवारी के हस्ताक्षर जरुरी होते हैं उनमें हस्ताक्षर कराने के लिए लोग आए दिन पटवार घर के चक्कर काटते रहते हैं लेकिन पटवारी मौके पर नहीं मिलता है फोन करते हैं तो फोन नहीं उठाते हैं गलती से यदि फोन उठा लिया तो उनका जवाब यही रहता है कि मैं फिल्ड में हूं अभी समय लगेगा आपको यदि जल्दी है तो आप ई मित्र की दुकान कागज रख दो मैं देख लूंगा

स्थानीय लोगों ने सिकंदरा पटवारी पर अवैध वसूली का आरोप लगाते हुए कहा कि सिकंदरा में अलवर गंगापुर मेगा हाईवे पर लकड़ी मंडी संचालित है जहां आए दिन सैकड़ो वाहनों की संख्या में हरे पेड़ों की लकड़ी काटकर लाई जाती है इन पर कार्यवाही करने की जिम्मेदारी पटवारी की भी बनती है लेकिन इन पर कार्रवाई न करने का कारण आखिर अवैध वसूली नहीं है तो क्या है ? लगातार प्रकृति प्रेमियों की शिकायत के बाद भी इसी ग्राम पंचायत में से हजारों की संख्या में पेड़ कट गए और उन्हें लकड़ी मंडी में लाकर बेच दिया गया ऐसे गैर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ प्रशासन आखिर कार्यवाही क्यों नहीं कर रहा है ?

सिकंदरा ग्राम पंचायत के सरपंच कैप्टन रामावतार सैनी का कहना है कि आए दिन जरूरतमंद स्थानीय लोग मेरे पास फोन करते हैं और पूछते हैं कि आपकी ग्राम पंचायत का पटवारी कहां पर है तब मैं पटवारी को फोन करता हूं तो पटवारी फोन नहीं उठाता है पटवारी की गैर जिम्मेदारियों को देखते हुए जनसुनवाई के अलावा उपखंड कार्यालय में उपस्थित होकर उपखंड अधिकारी को लिखित एवं मौखिक तौर पर उसकी शिकायत दी है जिस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है आए दिन लोग पटवार घर एवं ग्राम पंचायत के चक्कर काटते रहते हैं जब उन्हें मौके पर पटवारी नहीं मिलता है तो निराश होकर वापस लौट जाते हैं सिकंदरा उप तहसीलदार डी आर मीना से पटवारी जीवन राम मीणा पटवार घर एवं उप तहसील कार्यालय में नहीं आने का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मैं खुद भी इससे परेशान हूं यह न तो मेरा फोन उठाता है और आए दिन ड्यूटी पर न आकर फरार रहता है इसके बारे में मैंने सिकराय उपखंड अधिकारी को अवगत पहले ही करवा दिया था

अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सिकराय उपखंड अधिकारी (एसडीएम) की कार्यशैली को लेकर खड़ा हो गया है।स्थानीय लोगों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और प्रकृति प्रेमियों का आरोप है कि इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद एसडीएम स्तर पर जानबूझकर आंखें मूंदी गई हैं।जब पटवारी महीनों तक ड्यूटी से नदारद रहता है उप तहसीलदार खुद लिखित रूप से शिकायत करने की बात स्वीकार करता हैसरपंच द्वारा जनसुनवाई और कार्यालय में शिकायत दी जाती हैअवैध खनन, लकड़ी कटान और परिवहन खुलेआम चलता है। तो सवाल उठता है कि आखिर एसडीएम सिकराय किस दबाव या संरक्षण में कार्रवाई नहीं कर रहे?स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पटवारी पर कार्रवाई नहीं हो रही, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि उच्च स्तर का संरक्षण प्रतीत होता है।क्या यह संरक्षण बिना किसी लाभ के संभव है? क्या अवैध खनन और लकड़ी माफिया को प्रशासनिक शह मिल रही है?प्रकृति प्रेमियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार लिखित व मौखिक रूप से एसडीएम सिकराय को हरे पेड़ों की कटाई, अवैध खनन और लकड़ी मंडी की जानकारी दी, लेकिन हर बार फाइलें दबा दी गईं और कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।लोगों का कहना है कि“यदि एसडीएम चाहें तो एक दिन में कार्रवाई हो सकती है, लेकिन जानबूझकर चुप्पी साधी गई है।”यह चुप्पी अब मनमानी और संदिग्ध कार्यशैली के आरोपों में बदल चुकी है।आमजन का सवाल है कि क्या प्रशासन आम लोगों और प्रकृति के खिलाफ खड़ा है?क्या सरकारी पद का उपयोग जनता की सेवा के बजाय अवैध गतिविधियों को ढाल देने के लिए किया जा रहा है?यदि यही हाल रहा, तो आने वाले समय में न पर्यावरण बचेगा,न प्रशासन पर जनता का भरोसा और न ही कानून का भय अब जनता और प्रकृति प्रेमियों ने मांग की है कि सिकराय एसडीएम की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो पटवारी जीवनराम मीणा सहित जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई हो अवैध खनन और लकड़ी कटान पर तत्काल सख्त रोक लगे।