AEN से मारपीट मामले की सुनवाई धौलपुर में कराने की याचिका खारिज, जयपुर में ही चलेगा ट्रायल…
जयपुर/धौलपुर — सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को आदेश दिया कि वे दो हफ्ते के भीतर आत्मसमर्पण करें। यह आदेश राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा उनकी जमानत रद्द करने के बाद आया। सुप्रीम कोर्ट ने उनके स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) को फिलहाल लंबित रखा है और आत्मसमर्पण के चार सप्ताह बाद सुनवाई की तारीख निर्धारित की गई है।
घटना का विवरण
28 मार्च 2022 को धौलपुर जिले के बाड़ी विधानसभा क्षेत्र में बिजली विभाग के सहायक अभियंता हर्षाधिपति वाल्मीकि और जूनियर अभियंता नितिन गुलाटी के साथ कथित रूप से मारपीट हुई। आरोप है कि मलिंगा और उनके समर्थक अभियंताओं के कार्यालय में घुसे और हर्षाधिपति पर कुर्सी से हमला किया, साथ ही उन्हें जातिगत गालियाँ भी दीं। यह विवाद उस समय हुआ जब मलिंगा ने अपने क्षेत्र से बिजली ट्रांसफॉर्मर हटाने को लेकर आपत्ति जताई थी।
इस घटना के बाद मलिंगा पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
मलिंगा उस समय बाड़ी विधानसभा से कांग्रेस विधायक थे। हाल ही में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। उनके राजनीतिक करियर और प्रभाव पर इस मामले की वजह से सवाल उठ रहे हैं।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश
- राजस्थान हाईकोर्ट ने 5 जुलाई 2024 को मलिंगा की जमानत रद्द कर दी और उन्हें 30 दिन के भीतर आत्मसमर्पण का आदेश दिया।
- सुप्रीम कोर्ट ने बाद में आदेश दिया कि मलिंगा दो हफ्ते के भीतर आत्मसमर्पण करें। उनका SLP फिलहाल लंबित रखा गया है और सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
सुनवाई का स्थानांतरण
मामले की सुनवाई धौलपुर से जयपुर स्थानांतरित कर दी गई है। अदालत ने यह कदम गवाहों की सुरक्षा और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए उठाया। अब यह केस जयपुर की एससी/एसटी कोर्ट में चलेगा।
स्थानीय और राजनीतिक असर
मलिंगा ने बाड़ी विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया है। इस मामले के चलते उनके राजनीतिक भविष्य और क्षेत्रीय प्रभाव पर असर पड़ सकता है। सुनवाई जयपुर में होने से न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष होने की संभावना बढ़ गई है।
अगला कदम
अब जयपुर कोर्ट में ट्रायल होगा और सुप्रीम कोर्ट में लंबित SLP के फैसले का इंतजार रहेगा। इसके साथ ही गवाहों और अभियुक्त के बीच न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह से शुरू हो जाएगी।